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अनुशासन पर्व
अध्याय १३०
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महेश्वर उवाच
कामगेन विमानेन स वै चरति च्छन्दतः |  ५७   क
शक्रलोकगतः श्रीमान्मोदते च निरामय़ः ||  ५७   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति