भीष्म पर्व  अध्याय ६१

भीष्म उवाच

आत्मय़ोने महाभाग कल्पसङ्क्षेपतत्पर |  ५१   क
उद्भावन मनोद्भाव जय़ व्रह्मजनप्रिय़ ||  ५१   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति