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अनुशासन पर्व
अध्याय ५७
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वैशम्पाय़न उवाच
गन्धमाल्यनिवृत्त्या तु कीर्तिर्भवति पुष्कला |  २३   क
केशश्मश्रून्धारय़तामग्र्या भवति सन्ततिः ||  २३   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति