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द्रोण पर्व
अध्याय १३०
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सञ्जय़ उवाच
ततः शत्रुरथं त्यक्त्वा भीमो ध्रुवरथं गतः |  २३   क
ध्रुवं चास्यन्तमनिशं मुष्टिना समपोथय़त् |  २३   ख
स तथा पाण्डुपुत्रेण वलिना निहतोऽपतत् ||  २३   ग
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति