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द्रोण पर्व
अध्याय १३०
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सञ्जय़ उवाच
ततस्तव सुता राजन्भीमस्य रथमाव्रजन् |  २८   क
महता शरवर्षेण छादय़न्तो वृकोदरम् ||  २८   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति