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द्रोण पर्व
अध्याय १३०
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धृतराष्ट्र उवाच
निहते सैन्धवे वीरे भूरिश्रवसि चैव हि |  ३   क
यदभ्यगान्महातेजाः पाञ्चालानपराजितः ||  ३   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति