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आदि पर्व
अध्याय १३१
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वैशम्पाय़न उवाच
व्राह्मणेभ्यश्च रत्नानि गाय़नेभ्यश्च सर्वशः |  ९   क
प्रय़च्छध्वं यथाकामं देवा इव सुवर्चसः ||  ९   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति