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अनुशासन पर्व
अध्याय १३१
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महेश्वर उवाच
सर्वातिथ्यमुपातिष्ठञ्शेषान्नकृतभोजनः |  ३३   क
त्रेताग्निमन्त्रविहितो वैश्यो भवति वै यदि |  ३३   ख
स वैश्यः क्षत्रिय़कुले शुचौ महति जाय़ते ||  ३३   ग
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति