वन पर्व  अध्याय १३१

श्येन उवाच

उशीनर कपोते ते यदि स्नेहो नराधिप |  २२   क
आत्मनो मांसमुत्कृत्य कपोततुलय़ा धृतम् ||  २२   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति