उद्योग पर्व  अध्याय १३१

कुन्त्यु उवाच

श्रुतेन तपसा वापि श्रिय़ा वा विक्रमेण वा |  २२   क
जनान्योऽभिभवत्यन्यान्कर्मणा हि स वै पुमान् ||  २२   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति