उद्योग पर्व  अध्याय १३१

कुन्त्यु उवाच

क्षत्रधर्मरता धन्या विदुरा दीर्घदर्शिनी |  ३   क
विश्रुता राजसंसत्सु श्रुतवाक्या वहुश्रुता ||  ३   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति