उद्योग पर्व  अध्याय १३१

मातो उवाच

स्ववाहुवलमाश्रित्य योऽभ्युज्जीवति मानवः |  ४२   क
स लोके लभते कीर्तिं परत्र च शुभां गतिम् ||  ४२   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति