आश्रमवासिक पर्व  अध्याय २०

वैशम्पाय़न उवाच

आज्ञापय़ किमेतेभ्यः प्रदेय़ं दीय़तामिति |  ८   क
तदुपस्थितमेवात्र वचनान्ते प्रदृश्यते ||  ८   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति