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विराट पर्व
अध्याय ५६
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वैशम्पाय़न उवाच
तस्य जिष्णुरुपावृत्य पृथुधारेण कार्मुकम् |  २१   क
चकर्त गार्ध्रपत्रेण जातरूपपरिष्कृतम् ||  २१   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति