आदि पर्व  अध्याय ६८

वैशम्पाय़न उवाच

पोषो हि त्वदधीनो मे सन्तानमपि चाक्षय़म् |  ६३   क
तस्मात्त्वं जीव मे वत्स सुसुखी शरदां शतम् ||  ६३   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति