आदि पर्व  अध्याय २१०

वैशम्पाय़न उवाच

मधुरेण स गीतेन वीणाशव्देन चानघ |  १४   क
प्रवोध्यमानो वुवुधे स्तुतिभिर्मङ्गलैस्तथा ||  १४   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति