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आदि पर्व
अध्याय १३२
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वैशम्पाय़न उवाच
वेश्मन्येवं कृते तत्र कृत्वा तान्परमार्चितान् |  १३   क
वासय़ेः पाण्डवेय़ांश्च कुन्तीं च ससुहृज्जनाम् ||  १३   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति