आदि पर्व  अध्याय १३२

वैशम्पाय़न उवाच

स पुरोचनमेकान्तमानीय़ भरतर्षभ |  २   क
गृहीत्वा दक्षिणे पाणौ सचिवं वाक्यमव्रवीत् ||  २   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति