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शान्ति पर्व
अध्याय १३२
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भीष्म उवाच
अत्र कर्मान्तवचनं कीर्तय़न्ति पुराविदः |  १   क
प्रत्यक्षावेव धर्मार्थौ क्षत्रिय़स्य विजानतः |  १   ख
तत्र न व्यवधातव्यं परोक्षा धर्मय़ापना ||  १   ग
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति