अनुशासन पर्व  अध्याय १३२

उमो उवाच

वाचाथ वध्यते येन मुच्यतेऽप्यथ वा पुनः |  १७   क
तानि कर्माणि मे देव वद भूतपतेऽनघ ||  १७   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति