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वन पर्व
अध्याय १३२
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लोमश उवाच
उक्तस्त्वेवं भार्यया वै कहोडो; वित्तस्यार्थे जनकमथाभ्यगच्छत् |  १३   क
स वै तदा वादविदा निगृह्य; निमज्जितो वन्दिनेहाप्सु विप्रः ||  १३   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति