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उद्योग पर्व
अध्याय १३२
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विदुरो उवाच
इन्द्रो वृत्रवधेनैव महेन्द्रः समपद्यत |  २४   क
माहेन्द्रं च ग्रहं लेभे लोकानां चेश्वरोऽभवत् ||  २४   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति