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उद्योग पर्व
अध्याय १३२
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विदुरो उवाच
नाम विश्राव्य वा सङ्ख्ये शत्रूनाहूय़ दंशितान् |  २५   क
सेनाग्रं वापि विद्राव्य हत्वा वा पुरुषं वरम् ||  २५   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति