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वन पर्व
अध्याय १३३
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राजो उवाच
किं स्वित्सुप्तं न निमिषति किं स्विज्जातं न चोपति |  २५   क
कस्य स्विद्धृदय़ं नास्ति किं स्विद्वेगेन वर्धते ||  २५   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति