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उद्योग पर्व
अध्याय १३३
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मातो उवाच
निर्वादादास्पदं लव्ध्वा धनवृद्धिर्भविष्यति |  ३५   क
धनवन्तं हि मित्राणि भजन्ते चाश्रय़न्ति च ||  ३५   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति