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द्रोण पर्व
अध्याय १३३
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सञ्जय़ उवाच
विराटनगरे चापि समेताः सर्वकौरवाः |  १७   क
पार्थेन निर्जिता युद्धे त्वं च कर्ण सहानुजः ||  १७   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति