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द्रोण पर्व
अध्याय १३३
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सञ्जय़ उवाच
त्वमनासाद्य तान्वाणान्फल्गुनस्य विगर्जसि |  २२   क
पार्थसाय़कविद्धस्य दुर्लभं गर्जितं भवेत् ||  २२   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति