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अनुशासन पर्व
अध्याय ९५
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कश्यप उवाच
वृथामांसं समश्नातु वृथादानं करोतु च |  ६०   क
यातु स्त्रिय़ं दिवा चैव विसस्तैन्यं करोति यः ||  ६०   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति