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द्रोण पर्व
अध्याय १३३
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कृप उवाच
भ्रातरश्चास्य वलिनः सर्वास्त्रेषु कृतश्रमाः |  ३५   क
गुरुवृत्तिरताः प्राज्ञा धर्मनित्या यशस्विनः ||  ३५   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति