आदि पर्व  अध्याय १३४

वैशम्पाय़न उवाच

श्रुत्वागतान्पाण्डुपुत्रान्नानाय़ानैः सहस्रशः |  २   क
अभिजग्मुर्नरश्रेष्ठाञ्श्रुत्वैव परय़ा मुदा ||  २   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति