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अनुशासन पर्व
अध्याय ७२
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व्रह्मो उवाच
मृदुर्दान्तो देवपराय़णश्च; सर्वातिथिश्चापि तथा दय़ावान् |  १२   क
ईदृग्गुणो मानवः सम्प्रय़ाति; लोकं गवां शाश्वतं चाव्ययं च ||  १२   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति