अनुशासन पर्व  अध्याय १३४

उमो उवाच

तथा देवनदी चेय़ं सर्वतीर्थाभिसंवृता |  १७   क
गगनाद्गां गता देवी गङ्गा सर्वसरिद्वरा ||  १७   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति