अनुशासन पर्व  अध्याय १३४

उमो उवाच

न चैकसाध्यं पश्यामि विज्ञानं भुवि कस्यचित् |  २१   क
दिवि वा सागरगमास्तेन वो मानय़ाम्यहम् ||  २१   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति