अनुशासन पर्व  अध्याय १३४

भीष्म उवाच

अन्यथा वहुवुद्ध्याढ्यो वाक्यं वदति संसदि |  २८   क
अन्यथैव ह्यहंमानी दुर्वलं वदते वचः ||  २८   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति