अनुशासन पर्व  अध्याय १३४

भीष्म उवाच

सुस्वभावा सुवचना सुवृत्ता सुखदर्शना |  ३३   क
अनन्यचित्ता सुमुखी भर्तुः सा धर्मचारिणी ||  ३३   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति