अनुशासन पर्व  अध्याय १३४

भीष्म उवाच

परुषाण्यपि चोक्ता या दृष्टा वा क्रूरचक्षुषा |  ३८   क
सुप्रसन्नमुखी भर्तुर्या नारी सा पतिव्रता ||  ३८   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति