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अनुशासन पर्व
अध्याय १३४
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महेश्वर उवाच
वरुणस्य ततो गौरी सूर्यस्य च सुवर्चला |  ४   क
रोहिणी शशिनः साध्वी स्वाहा चैव विभावसोः ||  ४   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति