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शल्य पर्व
अध्याय ३८
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वैशम्पाय़न उवाच
ततो हलधरः श्रीमान्व्राह्मणैः परिवारितः |  २३   क
जगाम यत्र राजेन्द्र रुषङ्गुस्तनुमत्यजत् ||  २३   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति