वन पर्व  अध्याय १३४

वन्द्यु उवाच

शितेन ते परशुना स्वय़मेवान्तको नृप |  ३५   क
शिरांस्यपाहरत्वाजौ रिपूणां भद्रमस्तु ते ||  ३५   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति