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द्रोण पर्व
अध्याय १३४
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सञ्जय़ उवाच
सर्वैः पार्थिवशार्दूलैर्नानेनार्थोऽस्ति जीवता |  १४   क
अत्यन्तवैरी पार्थानां सततं पापपूरुषः ||  १४   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति