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द्रोण पर्व
अध्याय १३४
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सञ्जय़ उवाच
द्रवतस्तान्समालोक्य राजा दुर्योधनो नृप |  ५३   क
निवर्तय़ामास तदा वाक्यं चेदमुवाच ह ||  ५३   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति