शान्ति पर्व  अध्याय २३१

व्यास उवाच

यावानात्मनि वेदात्मा तावानात्मा परात्मनि |  २२   क
य एवं सततं वेद सोऽमृतत्वाय़ कल्पते ||  २२   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति