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द्रोण पर्व
अध्याय १३४
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सञ्जय़ उवाच
यावत्फल्गुनवाणानां गोचरं नाधिगच्छति |  ६४   क
कौरवः पार्थिवो वीरस्तावद्वारय़ तं द्रुतम् ||  ६४   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति