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शान्ति पर्व
अध्याय ३४४
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भीष्म उवाच
ततः स विप्रः कृतधर्मनिश्चय़ः; कृताभ्यनुज्ञः स्वजनेन धर्मवित् |  १०   क
यथोपदिष्टं भुजगेन्द्रसंश्रय़ं; जगाम काले सुकृतैकनिश्चय़ः ||  १०   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति