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अनुशासन पर्व
अध्याय १३५
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भीष्म उवाच
धर्मार्थी प्राप्नुय़ाद्धर्ममर्थार्थी चार्थमाप्नुय़ात् |  १२४   क
कामानवाप्नुय़ात्कामी प्रजार्थी चाप्नुय़ात्प्रजाः ||  १२४   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति