अनुशासन पर्व  अध्याय १३५

भीष्म उवाच

व्रह्मण्यो व्रह्मकृद्व्रह्मा व्रह्म व्रह्मविवर्धनः |  ८४   क
व्रह्मविद्व्राह्मणो व्रह्मी व्रह्मज्ञो व्राह्मणप्रिय़ः ||  ८४   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति