अनुशासन पर्व  अध्याय १३५

भीष्म उवाच

भूतावासो वासुदेवो सर्वासुनिलय़ोऽनलः |  ८९   क
दर्पहा दर्पदो दृप्तो दुर्धरोऽथापराजितः ||  ८९   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति