अनुशासन पर्व  अध्याय १३५

भीष्म उवाच

समावर्तो निवृत्तात्मा दुर्जय़ो दुरतिक्रमः |  ९६   क
दुर्लभो दुर्गमो दुर्गो दुरावासो दुरारिहा ||  ९६   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति