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भीष्म पर्व
अध्याय ५८
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सञ्जय़ उवाच
ततस्तु तावका राजन्परीप्सन्तोऽऽर्जुनिं रणे |  १५   क
मद्रराजरथं तूर्णं परिवार्यावतस्थिरे ||  १५   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति