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वन पर्व
अध्याय १३५
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लोमश उवाच
तत इन्द्रोऽकरोद्रूपं व्राह्मणस्य तपस्विनः |  ३०   क
अनेकशतवर्षस्य दुर्वलस्य सय़क्ष्मणः ||  ३०   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति